कविओं के इस मेले में
हम भी चले ठेले में
कविता का पाठ पढ़ाने
लोगों को अपना दुखड़ा सुनाने
चलो चले उस ओर
भोर दिखायी दे जिस ओर
अपनों का प्यार
अपनेपन का दुलार।
माँ की ममता
पापा का प्यार
बहन की लाड
भाई से तकरार
हम भी सुनाये कुछ बातें
कहीं न बीत जाये रातें।
लोकनाथ सेन लोकू
सहा शि पं
चंडी पारा कोनारी
हम भी चले ठेले में
कविता का पाठ पढ़ाने
लोगों को अपना दुखड़ा सुनाने
चलो चले उस ओर
भोर दिखायी दे जिस ओर
अपनों का प्यार
अपनेपन का दुलार।
माँ की ममता
पापा का प्यार
बहन की लाड
भाई से तकरार
हम भी सुनाये कुछ बातें
कहीं न बीत जाये रातें।
लोकनाथ सेन लोकू
सहा शि पं
चंडी पारा कोनारी

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