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गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

आंशू कवि 04

(1)
कोई गम आपको छू न पायेगी
हमारे साथ रहोगी तो
मुस्कुराना सिख जाओगी
जब उदास रहोगी तो
याद करना इस अनपढ़ को
फिर हस्‍ते हंस्‍ते रोने लग जाअोगी |
(2)
आरी हो या आरा
कट जाये रात सारा
फिर ना यूँ दुखी
होना आप दुबारा |

(3)
फ्री हिट की बात क्या
दिन और रात क्या
जमाने में जीना सीखा
अब गम की औकात क्या  |

(4)
हम बारिस भी खूब है
भीगने का मजा देते है
और जो मजा ना ले
उसे नाकों वाली सजा देते है  |

(5)
सुबह हुआ शाम हुआ,
दिन बदलता गया,
बदनाम होता गया ।
नाम की परवाह,
नहीं रही अब हमको,
बदमानों की लिस्ट में,
मेरा नाम आम हुआ ।
 

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