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गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

आंशू कवि 02

(1)
आप मन के आशीर्वाद हे
मया के बरसात हे
तुहरे दया कृपा से
मोर व्हाट्स अप्प के दुकान आबाद हे|
(2)
हम ला तो सोशल मीडिया के बीमारी हे
कविता पढ़े के लाचारी हे
लिखे ला आतिश ता
पूरा इतिहास लिख देतेव
मोर कलम बड़ा अत्याचारी हे |

(3)
फेविकॉल के मजबूत जोड़
दुश्मन भी ना पाये तोड़
टंगिया बसला के बात छोड़
पथरा म मुड़ी ला फोर |

(4)
वर्मा जी ये आँशु कवी का होथे
जेखर कविता ला सुनके सब्बो झन रोथे
कविता के बात ला नि समझे
फेर कवि जैसे बात ला घोरथे |
 

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