विश्व गुरु कहलाते थे हम
ज्ञान प्रवाह बहलाते थे हम ।
वो नालंदा और तक्षशिला
धूल धूसरित मिटटी में मिला ।
आर्यभट्ट और रामानुज की जननी
हर सूत्र और अंक है जनमी।
शुन्य का जहाँ जन्म हुआ
मानवता का पुनर्जन्म हुआ।
वसुधैव कुटुम्बकम् का शब्द दिया
राम कृष्ण ने जहा जन्म लिया।
वो धरती सुहानी मस्तानी थी
हर मुश्किल में सीना तानी थी।
बौद्ध विवेकानंद जैन मुनि सन्याशी थे
हरिश्चंद्र राम और शिवाजी वनवासी थे।
काशी की वो पावन धरती
लक्ष्मी जहां झाँसी पर मरती।
भगत मंगल का खून बहा
गांधी ने चुपचाप सबकुछ सहा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
मिट्टी वो भारत कहलाई ।
आक्रांताओं के चोटों को सहकर
जीता जग अपने बलपर लड़कर।
विश्व को राह दिखाएंगे हम
पुनः विश्व गुरु कहलायेंगे हम।
वंदे मातरम्।।।
लोकनाथ सेन "लोकू"
चंडी पारा कोनारी
ज्ञान प्रवाह बहलाते थे हम ।
वो नालंदा और तक्षशिला
धूल धूसरित मिटटी में मिला ।
आर्यभट्ट और रामानुज की जननी
हर सूत्र और अंक है जनमी।
शुन्य का जहाँ जन्म हुआ
मानवता का पुनर्जन्म हुआ।
वसुधैव कुटुम्बकम् का शब्द दिया
राम कृष्ण ने जहा जन्म लिया।
वो धरती सुहानी मस्तानी थी
हर मुश्किल में सीना तानी थी।
बौद्ध विवेकानंद जैन मुनि सन्याशी थे
हरिश्चंद्र राम और शिवाजी वनवासी थे।
काशी की वो पावन धरती
लक्ष्मी जहां झाँसी पर मरती।
भगत मंगल का खून बहा
गांधी ने चुपचाप सबकुछ सहा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
मिट्टी वो भारत कहलाई ।
आक्रांताओं के चोटों को सहकर
जीता जग अपने बलपर लड़कर।
विश्व को राह दिखाएंगे हम
पुनः विश्व गुरु कहलायेंगे हम।
वंदे मातरम्।।।
लोकनाथ सेन "लोकू"
चंडी पारा कोनारी

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