सुन्दर रूप मनमोहनी,
दिल की बगिया की सोहनी।
देख तुझे मेरा मन बोला,
डूब नयनो में अनपढ़ भी डोला।
बला की खूबसूरत है तू,
सुनंदरता की मूरत है तू।
न जाने क्या चमत्कार,
देख तुझे भुला घर बार।
सुंदर काले घन केश,
मन भावन तेरा है भेश।
बैठा अनपढ़ सोंच रहा,
बालो को अपने नोच रहा।
सुन्दर तेरे कटीले नैन,
रहता हर पल मन बेचैन।
सुन्दरता की मूरत है तू,
मेरे सपनो की सूरत है तू।
बनाया खुदा ने तूझे नाजो से,
सजाया मेरे अरमानो से।
होठो की तेरी मुस्कान,
पहुचाये कइयों को समसान।
दर्शन तेरा मिला है मुझको,
लाखो दूवाये है तुझको।
ना रख कदमो को जमी पर रानी,
तेरी मेरी एक कहानी।
देख मोहब्बत जग रूठा,
मेरा तो था किस्मत फुटा।
तन्हाई में मैं बैठा,
ले के दिल अपना टूटा।
रूप की तू रानी थी,
जग से बड़ी सयानी थी।
कहानी तो पुरानी थी,
पर सबको हैरानी थी।
सबको तो परेसानी थी,
सच तो अनपढ़ की रानी।
✒अनपढ़
लोकनाथ सेन
मो 9977580623
अमेरा, बलौदा बाजार
KCP amra- ACRR
