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गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

सिर्फ मेरे लिए....

संगमरमर को तरास्कर बनी है तू
सारी कारीगरी है तेरे लिए,
पर तू है सिर्फ मेरे लिए ।
खुदा ने फूंका है
जान तुझ पत्थर पर,
मेरी जान भी है तेरे लिए
पर तू है सिर्फ मेरे लिए ।
गुलाब की गुलाबी को समेट
बने है तुम्हारे लब,
जहाँ की सारी गुलाबी है तुम्हारे लिए
पर तुम हो सिर्फ मेरे लिए।
समुन्दर की गहराई से भी
गुहारें है तुम्हारे नैन,
मेरे दिल की सारी गहराई है तुम्हारे लिए
पर तुम हो सिर्फ मेरे लिए।
✒लोकनाथ सेन (2006)
बलौदा बाज़ार

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