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गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

आंशू कवि 05

(1)
माया की महिमा बड़ी अपार
रो रो कर मचाये हाहाकार |
(2)
ना दिखी कोई राह
ना जाने किस बात की थी चाह
हर ओर बस करते गुमराह |
(3)
माया की माया अपरंपार
मच गया हाहाकार
नारी शक्ति की उबाल
आ जाये ना भूचाल👏

(4) 
सम्हाला है जमाना
तेरे सम्हालने से
जमाने ने रंग बदला
तेरे बदलने से
इस दुनिया ने तो
सीखा ही न था
मुस्कुराना
सीखा ठहाका लगाना
बस तेरे मुस्कुराने से 🙏🏻🙏🏻
 

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