ब्लॉग आर्काइव

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

कालचक्र...

कालचक्र न रुका है न थमा है
निरंतर चलते चला है
निशिदिन प्रकृति निराकार
होंगे हर सत्य साकार
इंसान है तू बस इंसानियत में रह
इस दुनिया का राहगीर है मालिक न बन
देख तेरा संसार का असली मालिक ऊपर बैठा है सालिक🔥
लोकनाथ से

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें