कालचक्र न रुका है न थमा है
निरंतर चलते चला है
निशिदिन प्रकृति निराकार
होंगे हर सत्य साकार
इंसान है तू बस इंसानियत में रह
इस दुनिया का राहगीर है मालिक न बन
देख तेरा संसार का असली मालिक ऊपर बैठा है सालिक🔥
लोकनाथ से
निरंतर चलते चला है
निशिदिन प्रकृति निराकार
होंगे हर सत्य साकार
इंसान है तू बस इंसानियत में रह
इस दुनिया का राहगीर है मालिक न बन
देख तेरा संसार का असली मालिक ऊपर बैठा है सालिक🔥
लोकनाथ से

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