ब्लॉग आर्काइव

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

हाईकू 001

(1)
शब्दों की गंगा
लेखनी की ये नाव
और जमाव |
(2)
ये हाइकू है
शब्दों का जाल
देखो कमाल |

(3)
छाप छोड़ेंगे
हम कुछ अपना
लोकु जपना |

(4)
ये समन्दर
की लहरों को देखो
इनसे सीखो |

(5)
भाव आभाव
जीवन धुप छाव
जीवन नाव

(6)
लेखनी चली
मन भावन बनी
शब्दों की लड़ी |

(7)

भाव अभाव
मिले है धूप छाँव
जीवन नाव
(8)
बेटी का प्यार
जाने जग संसार
गर्वित भार
(9)
बिटिया ब्याही
सूना घर आँगन
याद दिलाये
(10)
नींद सताथे
दिन रात ऊंघाथे
सुतेब जाथे।
(11)
नींद में रेंगे
कोनो ल नई देखे
आँखि ल चेपे
(12)
ले ले उधार
शब्द शैली सुधार
प्रेम बुखार
(13)
भारतीयता
मैं से हम में आता
भाग्य विधाता |
(14)
भारत माता
चरण सुख पता
तू मेरी माता |
(15)
मैं हिंदुस्तानी
रक्त अर्पण ठानी
भरी जवानी
(16)
व्हाट्सअप
जम्मो कारज ठप्प
कहे सेटप
(17)
मूर्धन्यता से
धन्य की ओर चला
सबने छला |
(18)
आईडिया में
आया माया का जाल
जी का जंजाल |

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