ब्लॉग आर्काइव

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

हाईकांशू 001

(1)
असमानता
देश को हिस्सों
में है बांटता 👍🏻
(2)
विचारों के मंच में
विचारवानों का अभिनन्दन,
जीवन परिवर्तन हो जाये
बस इतना समर्थन 👏👏

(3)
नभ है सम
परिस्थिति विषम
ले चले हम 🏃🏻🏃🏻🏃🏻🏃🏻

(4)
आसमान के
चमचमाते तारे
विरही सारे

(5)
मन की बात हैं
हर पल जिसके साथ है
जीवन बगिया में
बस किसी का इंतजार है

(6)
तुकबंदी की शाम है
नशे में हर आम है
नशा कोई ऐसा वैसा नहीं,
ये कविताओं का जाम है 🙏🏻🙏🏻

(7)
कवित्त एक
सागर का गागर
वर्षा सावन🙏🏻

(8)
सौभाग्य का ये
दुर्भाग्य जीवन में
अंतर्मन में ।

(9)
लेखनी की ये
लिखावट की कला
जैसे अबला

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