ब्लॉग आर्काइव

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

आंशू कवि 06

(1)
आरजू किसी की
कोई क्या समझ पायेगा
ये मतवालों का मंच हैं
कोई और क्या समझ पायेगा |
(2)
कंप्यूटर में टाइपिंग
कराय ला आथे
आनी बानी के
गोठ ला सुनाथे
नई जानव मतलब
तभो ले रटवाथे |

(3)
शब्दों की जाल
कवियों का कमाल
जी का जंजाल |

(4)
समाज सेवा
परोपकार देवा
है जान लेवा |

(5)
अभिनन्दन
का क्रंदन सुनके
रोये जीवन 👏

(6)
पांच रुपया के जहर
बर पइसा नई हे,
पचास रुपया
दवाई बर कहा पाहू
मोरे पेंट चिरहा हे
कोन कोन ला
दिखाहु 🙏🏻🙏🏻
 
 
 

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