दिल की बात
शब्दो का साथ है छूटा लगता जैसे जग है रूठा। कोशिश करता कुछ बन जाये, काश मेरे शब्द ही तन जाए। इच्छा मैंने पाला लिखने की, किताब के कोने में दिखने की। *अनपढ़