दुनिया जिसपर टिका हुआ है,
घर घर जिसपर टिका हुआ है।
क्यों है वो अबला कहलाती
बिन तेरी दुनिया अधूरी रह जाती।
माँ है तू, बेटी है तू, बीबी है तू
फिर क्यों दुनिया में अबला बन जाती।
नव सृजन की पहचान है तू
फिर क्यों तू अनजान बन जाती।
शक्ति जिसके बिन है अधूरी
फिर क्यों इतना दमन सह जाती।
तेरे बिन है कौन है जन्मा
तू ही तो है अगम अजन्मा।
माँ का रूप धर अमृत बरसाया
दुनिया में आया तूने पाला।
शिक्षा देकर प्रथम गुरु तू
तेरे नैनो से दुनिया को जाना।
प्यार कअ सागर बनी
पत्नी बन दुल्हन सजी।
बेटी घर की रानी थी
ससुराल में बेगानी थी।
ना था कोई अपना पराया
सबसे तूने प्यार बरसाया।
बहन बन बैठी डोली
छोड़ी सारी सखी सहेली।
दादी की लोरी की तान
बढ़ जाती मेरी भी शान।
दुनिया बिन तेरे सोचु तो
लूट जाती है मेरी आन।
अनपढ़
लोकनाथ सेन
मो 9144886001
ब्लॉग आर्काइव
सोमवार, 7 मार्च 2016
ममता को समेटे
नारीत्व को लपेटे।
जमाना तुझको देखे
सहनशीलता लेके।
क्या है तेरी माया
सुंदरता की काया।
जग है तुझ में समाया
तूने सबको अपनाया।
आँशु तू बहाती है
हर दर्द सह जाती है।
संभव नहीं बिन सृजन
दुनिया हो जाये निर्जन।
दुखो तेरा समझ न पाता
तू सबका भाग्य विधाता।
देख तेरे आँखों में आँशु
मेरे दिल से बरसे रक्तांशु।
जीवन भर मैंने दूध पिया है
हर पल तेरे सायें में जिया है।
कर्ज तेरा मेरे जीवन पर,
ऋणी रहूँगा मैं जीवन भर।
अनपढ़
मो 9977580623
जो आग लगी है सीने में
क्या रख्खा है अब जीने में।
टुकड़ो में है कोई तोड़ चला
मैं अपने सांसो को छोड़ चला।
रुका हुआ जो पानी था
रगो में बहता पेशानी था।
छोड़ने वाले छोड़ गए
तोड़ने वाले तोड़ गए।
चुप बैठा हूँ मैं भी अबतक
जिन्दा बचा हूँ मैं जब तक।
मुझे इंतजार है किस बात की
मेरे अपनों के बुरे हालात की।
ऐसे में एक दिन आएगा
कोई अपना बच न पायेगा।
देश को छलनी करने वाला
मेरे घर में छल कर जायेगा।
लुटता अस्मत गैरो का कब
मेरा अपना लूटा जायेगा।
जा की कीमत ना औरो की
अपनों की जा जब जायेगी।
घर में लगते आग औरो का
मेरा घर भी झुलसा जायेगी।
ठंडी सांसे भरने वाला मैं
तब खून उबल ना पायेगी।
औरो की खबर पढ़ने वाला मैं
तब मेरी खबर छप जायेगी।
अनपढ़
लोकनाथ सेन
9144886001
