अपना पराया कोई न जग में,
सबके लिए बंधुत्व मन में ।
शिक्षाकर्मी हित हो नभ् में,
ज्ञान का सम्मान हो रन में ।
ले चले ज्ञान नौका को,
मझधार से हम पार कर ।
लेखनी को अपने धार कर,
जय विजय का सत्कार कर ।
सबका हित है, हमने माना,
नहीं चलेगा अब मनमाना।
भूली बिसरी बातेँ छोडो,
नए दिशा में राह मोड़ो ।
सबको अपना मान लिया,
जनमत ने स्वीकार किया।
ज्ञान की गगरी लिये,
चुनौतियोंओ का चादर सिये।
संगठन की शक्ति अपार,
ले चले नौका को पार मझधार ।
सभी को सम्मान मिला,
अपनेपन का भान लिया ।
बहुमत ने स्वीकार किया,
किसी का न तिरस्कार किया।
ये पद नहीं प्रतिष्ठा है,
हर शिक्षाकर्मी की निष्ठा है ।
✒ लोकनाथ सेन
मो 9977580623
सबके लिए बंधुत्व मन में ।
शिक्षाकर्मी हित हो नभ् में,
ज्ञान का सम्मान हो रन में ।
ले चले ज्ञान नौका को,
मझधार से हम पार कर ।
लेखनी को अपने धार कर,
जय विजय का सत्कार कर ।
सबका हित है, हमने माना,
नहीं चलेगा अब मनमाना।
भूली बिसरी बातेँ छोडो,
नए दिशा में राह मोड़ो ।
सबको अपना मान लिया,
जनमत ने स्वीकार किया।
ज्ञान की गगरी लिये,
चुनौतियोंओ का चादर सिये।
संगठन की शक्ति अपार,
ले चले नौका को पार मझधार ।
सभी को सम्मान मिला,
अपनेपन का भान लिया ।
बहुमत ने स्वीकार किया,
किसी का न तिरस्कार किया।
ये पद नहीं प्रतिष्ठा है,
हर शिक्षाकर्मी की निष्ठा है ।
✒ लोकनाथ सेन
मो 9977580623

बहुत खूब
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