ब्लॉग आर्काइव

शनिवार, 28 मई 2016

हर बात दिल की
मैं कहना चाहता हूँ।
जज्बात दिल की
मैं कहना चाहता हूँ।
न समझ सके तुम
समझाना चाहता हूँ।
जो भूल गयी हो तुम
याद दिलाना चाहता हूँ।
मैं उन दिनों की यादें
याद कराना चाहता हूँ।
कुछ भूली बिसरी बातो
फिर से दोहराना चाहता हूँ।
उन कसमो उन यादो को
मैं निभाना चाहता हूँ।
तेरे एहसास को फिर से
मैं महसूस करना चाहता हूँ।
जो नम है तेरी आँखे
उन्हें पोछना चाहता हूँ।
झील सी तेरी आँखों में
मैं डूबना चाहता हूँ।
उलझे हुए बालो को
मैं सवारना चाहता हूँ।
उड़ते हुए केशुओ को
मैं बंदी बनाना चाहता हूँ।
उन यादो को उन बातो को
मैं फिर से जीना चाहता हूँ।
जो छुट गया था कल में
उसे मैं फिर से पाना चाहता हूँ।
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✒अनपढ़
लोकनाथ सेन
बलौदा बाजार
मो 9977580623

बहु आखिर बेटी क्यो नही

अनपढ़ मैं बैठा
न कर पाउ कोई बात।
पढ़े लिखो की दुनिया में
मेरी क्या है औकात।
माँ बाप जहां
अब अपने नहीं होते।
सास ससुर की
पूजा होती दिन रात।
ब्याह हुयी
बेटी चली ससुराल।
बहु बानी पर
सम्हली नहीं परिवार।
गलती किसी
कोई न जान पाया।
ननद की शादी
ससुराल उसको न भाया।
आये दिन बेटी
मायके दर्शन दें आता।
सास की लाडली
अब भी याद है आती।
बहु आयी घर
पर वो मन को न भाँति।
बहु बनकर आई
पर वो भी भूल न पायी।
माँ बाप की लाड़ली
ससुराल को समझ न पायी।
पति बेचार
हो गया बेगाना।
किसका दे साथ
उसको समझ न आना।
चुपचाप है आना
नहा खाकर निकलजाना।
बैठ तमासा
देख रहा है।
ससुर भी रोटी
सेक रहा है।
बीवी के
डर से बेचारा।
सबकुछ देखकर भी
आँखे मिंज रहा है।
बिखरा घर है
बिखरा है आँगन
न होता अब है
किसी का भी जतन।
न बहु बहु ही
बन पाती है।
न सास को वो
फूटे आँख
सहाति है।
अब तो पूरी
दुनिया ही मुझे
दोषी नजर आती है।
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✒अनपढ़
लोकनाथ सेन
बलौदाबाजार
मो 9977580623