ब्लॉग आर्काइव

शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

अटल मन

कवि संगती,
होती बड़ी दुर्गति,
कवि की माया,
अनपढ़ थर्राया,
मन में घबराया।

शब्दों के बाण,
लगते जैसे त्राण।
मन को मोहे,
शब्दों को नित जोहे,
छंद सोरठा दोहे ।

मन है मेरा,
उर्वित भूपटल,
वादें हैं मेरे,
अविचल अटल,
स्थिर मन अटल।

✒ अनपढ़ कवि
लोकनाथ सेन
मो 9977580623

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