कवि संगती,
होती बड़ी दुर्गति,
कवि की माया,
अनपढ़ थर्राया,
मन में घबराया।
शब्दों के बाण,
लगते जैसे त्राण।
मन को मोहे,
शब्दों को नित जोहे,
छंद सोरठा दोहे ।
मन है मेरा,
उर्वित भूपटल,
वादें हैं मेरे,
अविचल अटल,
स्थिर मन अटल।
✒ अनपढ़ कवि
लोकनाथ सेन
मो 9977580623

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