दिल की बात
शब्दों की जो बोली है, रिस्तो की हंसी ठिठोली है । देख बातो के माया जाल, भुला मैं अपना शब्द ज्ञान । लेकर मसाल चल चला मैं, अनपढ़ अज्ञान बढ़ा मैं । शब्दों का मैं दीप जलाऊ, अशिक्षा का अंधकार हटाउ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें