लाखो के भीड़ में मैं अकेला,
माँ के सम्मान में कैसा झमेला।
ऑनलाइन लाइन की दुनिया है,
राष्ट्र भक्ति भी अब मजबूरिया है।
प्रश्न मेरे मन में है उठाता,
स्वतंत्रता आयी ये सोचता।
क्या स्वतन्त्र है हम ये सच है,
जीवन में कितना मच मच है।
गरीब गरीब हो रहा ये सच है।
आमिर अपने आमिरी में मस्त है।
नौकर शाहो को नौकरी की है चिंता,
गरीब की रोटी हर कोई है छिनता।
कपड़ो का अम्बार लगा,
गरीब नंगे बदन पला।
भारत अन्न का भंडार,
किसान क्यों है बदहाल।
तकनीक का जमाना है आया,
भूखों को न मिलता है खाना।
एक प्रश्न फिर से उठता है,
मेरे अंतस को नोचता है।
क्या मैं स्वतन्त्र हूँ,
या फिर परतंत्र हूँ।
जो है स्वतंत्र उनको बधाई,
पर जारी रहेगी मेरी लड़ाई।
पैसो का है बोल बाला,
गांधी को भी नोच डाला।
भाग दौड़ की कैसी जिन्दगी,
धन दौलत की करते बंदगी।
सवाल मेरा अब भी खड़ा,
मेरे आगे आके अडा।
क्या मैं स्वतन्त्र हूँ❓❓
जो स्वतन्त्र है उनको बधाई,
मेरी तो जारी है लड़ाई।
मन में जिनके प्रश्न अनेक,
चल मेरे साथ घुटने न टेक...
✒लोकनाथ सेन "अनपढ़"
अमेरा, बलौदा बाजार
मो 9977580623
ब्लॉग आर्काइव
सोमवार, 25 जनवरी 2016
क्या मैं स्वतन्त्र हूँ ??
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