ममता को समेटे
नारीत्व को लपेटे।
जमाना तुझको देखे
सहनशीलता लेके।
क्या है तेरी माया
सुंदरता की काया।
जग है तुझ में समाया
तूने सबको अपनाया।
आँशु तू बहाती है
हर दर्द सह जाती है।
संभव नहीं बिन सृजन
दुनिया हो जाये निर्जन।
दुखो तेरा समझ न पाता
तू सबका भाग्य विधाता।
देख तेरे आँखों में आँशु
मेरे दिल से बरसे रक्तांशु।
जीवन भर मैंने दूध पिया है
हर पल तेरे सायें में जिया है।
कर्ज तेरा मेरे जीवन पर,
ऋणी रहूँगा मैं जीवन भर।
अनपढ़
मो 9977580623
ब्लॉग आर्काइव
सोमवार, 7 मार्च 2016
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