ब्लॉग आर्काइव

सोमवार, 7 मार्च 2016

दुनिया जिसपर टिका हुआ है,
घर घर जिसपर टिका हुआ है।
क्यों है वो अबला कहलाती
बिन तेरी दुनिया अधूरी रह जाती।
माँ है तू, बेटी है तू, बीबी है तू
फिर क्यों दुनिया में अबला बन जाती।
नव सृजन की पहचान है तू
फिर क्यों तू अनजान बन जाती।
शक्ति जिसके बिन है अधूरी
फिर क्यों इतना दमन सह जाती।
तेरे बिन है कौन है जन्मा
तू ही तो है अगम अजन्मा।
माँ का रूप धर अमृत बरसाया
दुनिया में आया तूने पाला।
शिक्षा देकर प्रथम गुरु तू
तेरे नैनो से दुनिया को जाना।
प्यार कअ सागर बनी
पत्नी बन दुल्हन सजी।
बेटी घर की रानी थी
ससुराल में बेगानी थी।
ना था कोई अपना पराया
सबसे तूने प्यार बरसाया।
बहन बन बैठी डोली
छोड़ी सारी सखी सहेली।
दादी की लोरी की तान
बढ़ जाती मेरी भी शान।
दुनिया बिन तेरे सोचु तो
लूट जाती है मेरी आन।
��अनपढ़
लोकनाथ सेन
मो 9144886001

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