ब्लॉग आर्काइव

शनिवार, 16 जनवरी 2016

सुन्दर चेहरा देखा,
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नजाकत भरी ताज।
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ले कर कोमल चेहरा,
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ढकी हुयी थी लाज।
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दोहा 3

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