ब्लॉग आर्काइव

शनिवार, 16 जनवरी 2016

तीखे थे जिसके नयन,
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लिए मस्तक पर भान,
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बेटी भारत भूमि की,
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भारत की थी शान।
2 1 1 2 2 2 1
(दोहा)

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