कभी बिता था बचपन
जिन गलियो में घूमते।
राजा तो नहीं थे हम
बस पेपर थे बांटते।
जिंदगी ने जो मुकाम
आज मुझे दे दिया है।
जो कुछ भी है पास
आपका ही दिया है।
न कल मैं कुछ था
न आज मैं कुछ हूँ।
जिंदगी के ठोकरों से
मैं आज भी खुस हूँ।
✒अनपढ़
लोकनाथ सेन
बलौदाबाजार
मो 9977580623

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