दिल की बात
कौड़ी की बात बन जाती है खास सुने जज्बात
घुमे जमाना अपना न बनाना जग बेगाना
रोक ले हमे जहा में कोई नहीं बेगाना सही
टुटा था दिल तेरे दूर जाने से आजमाने से
✒अनपढ़ लोकनाथ
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें