ब्लॉग आर्काइव

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

जीवन जब बढ़ता है,
इंसान खुद से लड़ता है,
कमजोर दुसरो पर मढ़ता है,
कवि कविताये गढ़ता है,
✒अनपढ़

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