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शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

चेहरे की तेरी मुस्कान
कर देती है हैरान,
पागल बना तेरी एक नजर का,
अब तो बस इंतजार है कबर का।
आशिकी में लोग आफत कर देते है,
पर लोग हमारी सराफत का मिसाल देतें है।
वो हलकी सी तेरे चेहरे की मुस्कान,
आज भी बैठे है हम सीना तान।
जुनून था इश्क का तेरा दीदार हो जाये,
हम तो बैठे है की एक बार फिर से प्यार हो जाये,
✒अनपढ़
लोकनाथ सेन

��शुभ रात्रि��

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