हर बात दिल की
मैं कहना चाहता हूँ।
जज्बात दिल की
मैं कहना चाहता हूँ।
न समझ सके तुम
समझाना चाहता हूँ।
जो भूल गयी हो तुम
याद दिलाना चाहता हूँ।
मैं उन दिनों की यादें
याद कराना चाहता हूँ।
कुछ भूली बिसरी बातो
फिर से दोहराना चाहता हूँ।
उन कसमो उन यादो को
मैं निभाना चाहता हूँ।
तेरे एहसास को फिर से
मैं महसूस करना चाहता हूँ।
जो नम है तेरी आँखे
उन्हें पोछना चाहता हूँ।
झील सी तेरी आँखों में
मैं डूबना चाहता हूँ।
उलझे हुए बालो को
मैं सवारना चाहता हूँ।
उड़ते हुए केशुओ को
मैं बंदी बनाना चाहता हूँ।
उन यादो को उन बातो को
मैं फिर से जीना चाहता हूँ।
जो छुट गया था कल में
उसे मैं फिर से पाना चाहता हूँ।
✒अनपढ़
लोकनाथ सेन
बलौदा बाजार
मो 9977580623
ब्लॉग आर्काइव
शनिवार, 28 मई 2016
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