दिल की बात
ऐसे टूट के बिखरी है जिंदगी अब सिमटने का मन करता है। टूट के पत्थर भी मिटटी बन जाती है, अब मिटटी से लिपटने का मन करता है।
शुभरात्रि
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें