ब्लॉग आर्काइव

रविवार, 17 अप्रैल 2016

अनपढ़ दोहा (03)

मेरा मेरा क्यों करे,
क्या तेरा है बोल।
नश्वर काया ढो रहा,
क्या है तेरा मोल।
**दोहा**

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