ब्लॉग आर्काइव

गुरुवार, 17 मार्च 2016

मोहब्बत के दिवाने हैं, तुझी से प्यार करते है।
तेरे आसिक पुराने है, तुझे बस याद करते हैं।

मोहब्बत वो नही जो, लोग कुबार्न होते हैं।
मोहब्बत है जिसमें, लोग आबाद होते हैं।

मोहब्बत को युं ही लोग, बदनाम करते हैं।
अपनी ही आबरू को जो, निलाम करते है।

मोहब्बत को ना समझना, जमाने की फितरत है।
मोहब्बत में मिट जाना, ये कैसी जुर्रत है।

मोहब्बत एक तोहफा है, जिससे इजहार करते हैं।
मोहब्बत के उसुलों से पर, हम इनकार करते है।

** अपनढ़
लोकनाथ सेन
मो नं. 9977580623

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