[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: शब्दों की माला
गीत नहीं है ज्वाला
है पाठशाला
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: बिखरी स्याही
शब्द प्यास बुझती
राह बताती।
✒अनपढ़
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: सीखे जमाना
हमें भी आजमाना
नहीं बहाना।
✒अनपढ़
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: **तांका**
गुनगुनाते
प्रीत गीत है गाते
मन को भाते।
कवित्त ऐसा रस
रहते मदमस्त।
✒अनपढ़
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: जो पियो दूध
बन जाओगे बुद्ध
मतिस्क सुद्ध।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: दिल टूट के बिखर गया
शब्द मेरे निखर गया।
तोड़ने वाला तोड़ गया
मोहब्बत साथ छोड़ गया।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन:
इतनी खुशी
बर्दास्त नहीं होती
चैन से सोती।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: मोहब्बत में मरने वालो का
जब भी नाम लिखा जायेगा।
किसी न किसी लकीर में
मेरा नाम भी आएगा।
मजनू ना सही तो क्या हुआ
ये अनपढ़ दीवाना कहलायेगा।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: हमें तो मोहब्बत की तलाश थी
जरूर तुम में कोई तो बात थी
अँधेरी रांतो में चांदनी की तलाश थी
तेरे हुश्न में जरूर कोई बात थी।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: लिखने वाले तो
मोहब्बत के नाम
चाँद तारे भी लिख देते है।
हम तो वो सितारे है
जो विज्ञापन भी
सुपर हिट देते है।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: मोहब्बत में खोने वालो का
कोई तो पता होगा
दिल चिर के देखो
कुछ तो लिखा होगा
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: हो गतिरोध
पर नहीं विरोध
कवित्व बोध।
[4:58PM, 3/10/2016] लोकनाथ सेन: आशिकी में दिल तोड़ चुके है
तेरी गलियो से मुह मोड़ चुके है।
ऐ जालिम जिन्दा तो हम आज भी है
बस जिंदादिली छोड़ चुके है।
✒अनपढ़
ब्लॉग आर्काइव
गुरुवार, 10 मार्च 2016
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