ब्लॉग आर्काइव

बुधवार, 13 जनवरी 2016

सोने की कीमत
जौहरी ही समझता है,
लोहार तो कबाड़ में
लोहा खोजता रहता है।
कवि की कविता,
साहित्यकार समझ पाता है,
पढ़े लिखे अनपढ़,
मात्रावो में त्रुटिया
खोजते रह जाता है

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