दिल की बात
सोने की कीमत जौहरी ही समझता है, लोहार तो कबाड़ में लोहा खोजता रहता है। कवि की कविता, साहित्यकार समझ पाता है, पढ़े लिखे अनपढ़, मात्रावो में त्रुटिया खोजते रह जाता है
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