ब्लॉग आर्काइव

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

बदलते बादल की बहार आई है
फिर से सावन झूम इस बार आई है।
उमड़ घुमड़ कर बादल बरसा
सभी दिशा नव हरयाली परसा।
वन उपवन में नन्हे पौध उगे है
प्रकृति मन में नए अरमान जगे है।
किट पतंगे चहु ओर उड़ रहे है
नीर नित नए नए धाराये जुड़ रहे है।
उमड़ घुमड़ रही काली बदरा
चहु ओर खेतो में फैली अकरा।
उम्मीदों की नई फसल लगी है
चहु ओर देखो हरियाली सजी है।
घर में सज रहे है बैल और हल
खेतो में बरसा बरस जाये जो कल।
ले उम्मीदों की अब नयी फसल
मिट्टी को रहा हाथो से मसल।
उत्तम बीज और खाद तलासे
मिट्टी और पत्थर खेतो में तरासे।
धरती को चीर हम बीज लगाये
माँ के आँचल में सोना उगाये।

✒अनपढ़
लोकनाथ सेन
सहायक शिक्षक पं
बलौदाबाजार
9144886001